ये ज़िन्दगी है मेरी, पर मैं नहीं हूँ
सारी दुनिया है सही, बस मैं नहीं हूँ।
न जाने कैसी कश्मकशों का दौर है,
आईने में क्यों दिखता कोई और है।
किसी के लिए मैं मुझ-सी ही नहीं हूँ,,
हाँ, ये ज़िन्दगी है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
भीड़ का हिस्सा हो जाना मंज़ूर नहीं था,
जीने का तो मगर मुझको सबूर नहीं था।
धीरे-धीरे तरीका वो सीख रही हूँ,,
ये ज़िन्दगी तो है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
हार मान जाने को जी नहीं करता,
कोशिश कर-कर के ये मन नहीं भरता।
अक्सर राहों में ठोकर खा गिरी हूँ,,
ये ज़िन्दगी है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
मन मारने की आदत-सी हो गई है,
हर एक ख्वाहिश ज़हर पी के सो गई है।
मर-मर के आजकल मैं जीने लगी हूँ,,
ये ज़िन्दगी है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
सारी दुनिया है सही, बस मैं नहीं हूँ
ये ज़िन्दगी है मेरी, पर मैं नहीं हूँ।
सारी दुनिया है सही, बस मैं नहीं हूँ।
न जाने कैसी कश्मकशों का दौर है,
आईने में क्यों दिखता कोई और है।
किसी के लिए मैं मुझ-सी ही नहीं हूँ,,
हाँ, ये ज़िन्दगी है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
भीड़ का हिस्सा हो जाना मंज़ूर नहीं था,
जीने का तो मगर मुझको सबूर नहीं था।
धीरे-धीरे तरीका वो सीख रही हूँ,,
ये ज़िन्दगी तो है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
हार मान जाने को जी नहीं करता,
कोशिश कर-कर के ये मन नहीं भरता।
अक्सर राहों में ठोकर खा गिरी हूँ,,
ये ज़िन्दगी है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
मन मारने की आदत-सी हो गई है,
हर एक ख्वाहिश ज़हर पी के सो गई है।
मर-मर के आजकल मैं जीने लगी हूँ,,
ये ज़िन्दगी है मेरी पर मैं नहीं हूँ।।
सारी दुनिया है सही, बस मैं नहीं हूँ
ये ज़िन्दगी है मेरी, पर मैं नहीं हूँ।
अभी तो सिर्फ शब्द ढूंढ रहा हूँ, शब्द मिलते ही कमेंट करूँगा। अभी तो तुम लिखती रहो, तुम्हारे मंज़िल पर पहुचने का इंतज़ार करूँगा।
ReplyDeletewah wahh....:P
Delete
ReplyDeletekoi sath de ya na de chalna apko aata hai,
har aag se vakif ho,
jalna apko aata hai...
waah waah Sir... Intnnniiiiii tarreefffff.... :P Par nikal ayenge mere... :P
Deleteबहुत खुब कहती है आपके ब्लॉग की टैग लाइन ।
Delete"ज़िन्दगी की रफ़्तार बहुत तेज़ है, थमना चाहती हूँ मगर वक़्त नहीं है।"
फिर अलबत्ता ये हताशा भरी बातें क्यों कर रही हो ?
ये अलफाज़ बड़े खुबसूरत है।
जिसे पिरोया तुमने बड़ा सटिक है।
मगर इतना कहना चाहुंगा ऐ मेरे दोस्त
ये जिंदगी का कारवां भी बड़ा अजीब है।
कभी हँसाती, कभी रूलाती ये जिंदगी
थकना नही है साथी, चलते हैं जाना।
तुम, तुम हो और बस तुम ही हो
बदलता तो बस समय है ।
धैर्य रख पथिक ।
वो ऊपर वाला कभी तुझ पर भी महरबाॅ होगा।
Ummeed Ab bhi magar zinda hai.. Bas ek padaav hai shayad jo bura hai.. Kal achha bhi hoga shayad.. Pata nahin. Kabhi kabhi behek jaane ko jee karta hai, aur us behkaawe mein hum yunhi shabdon ka khel khel lete hain.. Bas!! Isi khel se zinda hain....
ReplyDeleteUmda+Mummtaaz+chumeshwari= Mast Awesome beautiful
ReplyDeletethanks.... But, aap kaun???
ReplyDeleteThese lines are really very touchy. What I liked most is the combination of words which convey the feelings with utmost depth.
ReplyDelete"हर एक ख्वाहिश ज़हर पी के सो गई है।"... What I liked most. Simply Wonderful.
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