1. मैं रश्क़ हूँ तेरे सीने की,
ख़लिश करती है जो दिल में तेरे।
2. उन आँखों में शायद तारीफ़ थी हमारी,
ग़र समझ जाते तो आज तन्हा न होते।
3. मेरी आँखों के मंज़र तू पढ़ता है अगर,
दिल की आवाज़ को सुनता क्यों नहीं।
4. है एक कश्मकश कैसे कहूँ,
जज़बात को अल्फ़ाज़ नहीं मिलते।
5. ख़ास कह दिया है तुमने हमको जब से अपना,
ये दिल बस कश्मकशों के समुंदर में हिचकोले खा रहा है।
6. कह पाते नहीं जो कभी किसी से,
जज़बात वो काग़ज़ पर उतार देते हैं हम।
7. जकड़े हुए थे जज़बात जो दिल में कभी,
वो अब फ़िज़ाओं संग बह रहे हैं।
8. कर लूँ इश्क़ इस बंजारेपन से,
या ख़्वाबों में उनकी राह तकती जाऊँ।
9. हुनर है मुझमें तेरी ख़ामोशियों को पढ़ लेने का,
यूँहीं मुझको तू बेवफ़ा ना समझ।
10. सहारे की ज़रुरत नहीं हमको,
बस एक तेरे साथ की उम्मीद है।
10. सहारे की ज़रुरत नहीं हमको,
बस एक तेरे साथ की उम्मीद है।
agla zazbaat kab aayega
ReplyDelete"हुनर है मुझमें तेरी ख़ामोशियों को पढ़ लेने का,
ReplyDeleteयूँहीं मुझको तू बेवफ़ा ना समझ।" perfect....