Friday, 16 January 2015

मेरा अज़ीज़ दोस्त

एक दोस्त है मेरा बहुत अज़ीज़,
ध्यान में जिसके रहती हर चीज़।

लिखती हूँ जब मैं नग़मा कोई,
वो शौक़ से उसको पढ़ता है।
तहरीर का मेरी हर एक शब्द,,
उसको तो बहुत ही जचता है।।

जब कभी हौंसला हार जाती हूँ  मैं,
साथ मेरे उस पल वो हो जाता है।
ग़र आँखों से आंसू गिर जाए मेरी,,
दिल उसका भी उदास हो जाता है।।

एक दोस्त है मेरा बहुत अज़ीज़,
ध्यान में जिसके रहती हर चीज़।

एक दिन आकर वो बोला मुझसे,
देखा  है मैंने हर काम तेरा।
ये निश्चय कर लिया है अब मैंने,,
'लेखिका' है अब से नाम तेरा।।

उसकी दुआओं का असर तो है,
कि हुनर मेरा ये निखरा है।
चाहने वाले बढ़ रहे हैं हर दिन,,
ऐसे मेरा हर शब्द बिखरा है।।

एक दोस्त है मेरा बहुत अज़ीज़,
ध्यान में जिसके रहती हर चीज़।

वो अकसर ये कहता है मुझसे,
लेखिका तू बहुत प्यारी है।
अब कैसे मैं ये समझाऊँ उसे,,
प्यारी ये दोस्ती हमारी है।।

मेरे अज़ीज़ दोस्त के दामन में,
ए खुदा बस खुशियाँ ही भर दे।
कुछ ऐसा तोहफ़ा दे तू उसको,,
जीवन उसका जो तर कर दे।।

एक दोस्त है मेरा बहुत अज़ीज़,
ध्यान में जिसके रहती हर चीज़।।    

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